वोटर लिस्ट और UGC के मुद्दे पर बीजेपी, कांग्रेस और सुभासपा के बीच जमकर नोकझोंक

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 'आजतक पंचायत अयोध्या' में कार्यक्रम 'चंदा चोरों का चुनावी टेस्ट' सेशन में प्रदेश और देश की राजनीति पर जबरदस्त बहस देखने को मिली. इस चर्चा में मंच पर बीजेपी के मुख्य प्रवक्ता दिनेश प्रताप सिंह, कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता सुरेंद्र सिंह राजपूत और सुभासपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता र...

 'आजतक पंचायत अयोध्या' में कार्यक्रम 'चंदा चोरों का चुनावी टेस्ट' सेशन में प्रदेश और देश की राजनीति पर जबरदस्त बहस देखने को मिली. इस चर्चा में मंच पर बीजेपी के मुख्य प्रवक्ता दिनेश प्रताप सिंह, कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता सुरेंद्र सिंह राजपूत और सुभासपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता राघवेंद्र द्विवेदी मौजूद रहे.

उत्तर प्रदेश की चुनावी राजनीति में वोट चोरी, एसआईआर, यूजीसी विवाद और इंडिया गठबंधन की एकजुटता को लेकर राजनीतिक घमासान तेज होता दिखाई दे रहा है. एक टीवी डिबेट में बीजेपी, कांग्रेस और सुभासपा के प्रवक्ताओं के बीच तीखी बहस हुई.

कांग्रेस ने वोटर लिस्ट में गड़बड़ियों का मुद्दा उठाया, जबकि बीजेपी ने इसे मतदाता सूची के नियमित शुद्धीकरण की प्रक्रिया बताया. यूजीसी के नियम पर सुभासपा ने कहा कि ऐसे नियम नहीं बनने चाहिए, जिससे किसी समाज में डर पैदा हो. 

कांग्रेस प्रवक्ता सुरेंद्र सिंह राजपूत ने 'इंडिया' (INDIA) गठबंधन की मजबूती का दावा करते हुए वोटर लिस्ट और सरकार की नीतियों पर जमकर निशाना साधा. सुरेंद्र राजपूत ने कहा, कि उत्तर प्रदेश में कांग्रेस और अखिलेश यादव (सपा) पानी की तरह एक हैं. जितनी लाठी मार लें, पानी अलग नहीं होता. उत्तर प्रदेश में क्षेत्रीय ताकत समाजवादी पार्टी और राष्ट्रीय ताकत राहुल गांधी मिलकर बीजेपी के सामने खड़े हैं.

सुरेंद्र सिंह राजपूत ने आरोप लगाया कि देश में वोटर लिस्ट में गड़बड़ियां लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए गंभीर चिंता का विषय हैं. उन्होंने कहा कि राहुल गांधी और अखिलेश यादव इस मुद्दे को राष्ट्रीय स्तर पर उठा रहे हैं और उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी तथा कांग्रेस मिलकर बीजेपी के खिलाफ लड़ रहे हैं.

उन्होंने पीलीभीत के अमरिया तहसील का उदाहरण देते हुए आरोप लगाया कि मतदाता पहचान पत्रों में नाम की गलतियां की गईं। उन्होंने मयंक गोस्वामी नाम के कर्मचारी के खिलाफ कार्रवाई को लेकर भी सवाल उठाए और दावा किया कि इस मामले में अब तक पर्याप्त कार्रवाई नहीं हुई है.

सुरेंद्र सिंह राजपूत ने उत्तर प्रदेश के राज्य निर्वाचन आयोग और केंद्रीय निर्वाचन आयोग के आंकड़ों में अंतर का मुद्दा भी उठाया. उन्होंने पंचायत चुनाव की मतदाता सूची और विधानसभा चुनाव की मतदाता सूची में मतदाताओं की संख्या में करीब दो करोड़ का अंतर बताया. उन्होंने पूछा कि आखिर इन आंकड़ों में इतना अंतर क्यों है.

बीजेपी प्रवक्ता दिनेश प्रताप सिंह ने कांग्रेस के खारिज करते हुए कहा कि मतदाता सूची का शुद्धीकरण हर चुनाव से पहले होने वाली नियमित प्रक्रिया है.उन्होंने कहा कि मतदाता सूची में केवल उन्हीं भारतीय नागरिकों का नाम होना चाहिए, जिनकी उम्र 18 वर्ष पूरी हो चुकी है और जो जीवित हैं। मृत व्यक्तियों, अपात्र लोगों और कथित फर्जी दस्तावेजों के आधार पर नाम दर्ज कराने वालों को सूची में बनाए रखने की मांग नहीं की जा सकती.

उन्होंने विपक्ष पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि किसी पात्र मतदाता का नाम सूची में नहीं है तो कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं को अभियान चलाकर उसका नाम जुड़वाना चाहिए.

एनडीए (NDA) की सहयोगी सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के प्रवक्ता राघवेंद्र द्विवेदी ने विपक्ष के दावों और यूजीसी के मुद्दे पर अपनी बात रखी, राघवेंद्र द्विवेदी ने कांग्रेस और सपा पर तंज कसते हुए कहा कि अखिलेश यादव का जो 'साइकिल' का आधार था, वह अब गायब हो चुका है. विपक्ष चुनाव हारने के बाद अपनी कमियां छुपाने के लिए ईवीएम या वोट चोरी का बहाना बनाता है.

अखिलेश यादव के 12 दिसंबर के संभावित अयोध्या दौरे पर उन्होंने कहा, "चुनाव आ गए हैं तो सब दरवाजे पर जाकर मत्था टेकेंगे. लेकिन अखिलेश यादव को बहुत देर हो चुकी है, उन्हें 2022 या 2024 में ही आना चाहिए था. 12 बजे तक 'अली-अली' और 12 बजे के बाद 'बजरंग बली' करने वाली राजनीति नहीं चलेगी.

यूजीसी के विषय पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार सुप्रीम कोर्ट में कमेटी बनाने की बात कह रही है, जिसका स्वागत है. यूजीसी लागू होना चाहिए, लेकिन किसी व्यक्ति या जाति विशेष को टारगेट करके कोई नियम नहीं बनना चाहिए. Court और कानून सर्वोपरि हैं. 

बहस के दौरान उत्तर प्रदेश में कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के बीच सीट बंटवारे और तालमेल का मुद्दा भी उठा. सुरेंद्र सिंह राजपूत ने दावा किया कि इंडिया गठबंधन उत्तर प्रदेश की सभी 403 विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ने की तैयारी करेगा. उन्होंने स्पष्ट किया कि किस सीट पर किस पार्टी का उम्मीदवार चुनाव लड़ेगा, इसका फैसला राहुल गांधी, अखिलेश यादव और मल्लिकार्जुन खरगे मिलकर करेंगे.

उन्होंने सीट बंटवारे को लेकर चल रही 170 या 200 सीटों की मांग संबंधी खबरों को गलत बताया. वहीं, दिनेश प्रताप सिंह ने विपक्षी गठबंधन की एकजुटता पर सवाल उठाते हुए कहा कि कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के बीच अंदरूनी खींचतान है उन्होंने कांग्रेस की चुनावी स्थिति पर तंज कसते हुए कहा कि राहुल गांधी के नेतृत्व में पार्टी लगातार चुनाव हार रही है.

चिराग पासवान की उत्तर प्रदेश की राजनीति में सक्रियता और एनडीए में संभावित भूमिका पर भी चर्चा हुई. सुरेंद्र सिंह राजपूत ने बीजेपी और उसके सहयोगियों के बीच तालमेल को लेकर सवाल उठाए। इस पर राघवेंद्र द्विवेदी ने कहा कि लोकतंत्र में किसी भी राजनीतिक दल को चुनाव लड़ने का अधिकार है। एनडीए में नए सहयोगियों को लेकर अंतिम फैसला गठबंधन की बैठक में लिया जाएगा, 

सुभासपा के प्रवक्ता राघवेंद्र द्विवेदी ने कहा कि यूपी में बीजेपी के साथ जो सहयोगी दल हैं, वहीं रहेंगे. इसके अलावा बिहार के किसी भी दल को शामिल नहीं किया जाएगा. यूपी में चार स्तंभ एनडीए को मजबूत किए हुए हैं, किसी पांचवें की जरूरत नहीं है. 

यूजीसी के नए नियमों को लेकर भी बहस हुई. कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा कि नियम लागू होने चाहिए, लेकिन उनका क्रियान्वयन इस तरह नहीं होना चाहिए जिससे किसी विशेष जाति या वर्ग को निशाना बनाए जाने की आशंका पैदा हो.उन्होंने केंद्र सरकार की ओर से सुप्रीम कोर्ट में कमेटी बनाने की बात का स्वागत किया.

बीजेपी प्रवक्ता दिनेश प्रताप सिंह ने कहा कि सरकार किसी के साथ अन्याय नहीं चाहती और न्यायपालिका के आदेशों का सम्मान किया जाना चाहिए. उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के स्थगन आदेश के बाद इस विषय पर टिप्पणी करना उचित नहीं होगा.

अखिलेश यादव के 12 तारीख को अयोध्या दौरे को लेकर भी तीखी बयानबाजी हुई. बीजेपी की ओर से सवाल उठाया गया कि अखिलेश यादव को अयोध्या जाने में इतनी देर क्यों लगी। इस पर कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा कि भगवान राम ने यदि अखिलेश यादव को बुलाया है तो उनका अयोध्या जाना स्वागत योग्य है.

सुरेंद्र सिंह राजपूत ने राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा को लेकर भी बीजेपी पर निशाना साधा और कहा कि धार्मिक परंपराओं में संतों और शंकराचार्यों की भूमिका महत्वपूर्ण होनी चाहिए थी.

आजतक पंचायत अयोध्या के मंच पर वोटर लिस्ट की शुद्धता, कथित वोट चोरी, यूजीसी विवाद, गठबंधन की एकजुटता और राम मंदिर जैसे मुद्दे छाए रहे। कांग्रेस ने चुनावी पारदर्शिता पर सवाल उठाए तो बीजेपी ने विपक्ष की राजनीतिक रणनीति और संगठनात्मक क्षमता पर पलटवार किया. स्पष्ट है कि उत्तर प्रदेश की राजनीति में आगामी चुनाव से पहले इन मुद्दों पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच टकराव और तेज होने के आसार हैं. 

Original Source
https://www.aajtak.in/elections/assembly-chunav/story/panchayat-aajtak-voter-list-ugc-bjp-congress-sbsp-politicl-fight-ntcpkb-dskc-2690713-2026-11-07?utm_source=rss
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