ट्रंप ने माना- ईरान जंग से रिपब्लिकन्स को हुआ चुनाव में नुकसान, लेकिन बोले- फिर करेंगे सैन्य कार्रवाई
अमेरिका में मिडटर्म चुनाव में रिपब्लिकन पार्टी की करारी हार के पीछे ईरान के साथ युद्ध भी एक बड़ी वजह बना. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने खुद माना है कि इस युद्ध के चलते पेट्रोल की कीमतें बढ़ीं, जिससे अमेरिकी लोगों की जेब पर दबाव पड़ा. हालांकि, इस नुकसान के बावजूद ट्रंप अपने फैसले से पीछे हटने को तैयार नहीं हैं. उनका कहना है कि अगर उन्हें फिर से यही फैसला लेना पड़े, तो वह दोबारा ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई करेंगे.
ट्रंप ने माना कि ईरान युद्ध की वजह से पेट्रोल महंगा हुआ. इससे पहले से महंगाई और रोजमर्रा के खर्चों से परेशान अमेरिकी परिवारों पर आर्थिक बोझ बढ़ा. उन्होंने कहा कि लंबे समय के लिहाज से ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकना जरूरी था. इसलिए वह इस सैन्य कार्रवाई को सही मानते हैं.
यह बयान ऐसे समय आया है, जब मिडटर्म चुनाव में डेमोक्रेटिक पार्टी ने प्रतिनिधि सभा (हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स) और सीनेट, दोनों पर नियंत्रण हासिल कर लिया है. इस हार से ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी को बड़ा झटका लगा है. अब डेमोक्रेट्स के पास ट्रंप सरकार के फैसलों को चुनौती देने के लिए ज्यादा ताकत होगी.
ईरान के साथ सैन्य टकराव का असर सिर्फ युद्ध तक सीमित नहीं रहा. इसका असर अमेरिका के ऊर्जा बाजार पर भी पड़ा. मिडिल ईस्ट में तनाव बढ़ने से तेल की सप्लाई प्रभावित हुई. खासकर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से जहाजों की आवाजाही को लेकर चिंता बढ़ गई. जो कि दुनिया के सबसे अहम तेल रास्तों में से एक है. दुनिया में बिकने वाले कच्चे तेल का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है. यहां जहाजों की आवाजाही में रुकावट आने का असर अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों पर पड़ता है.
तेल महंगा होने का सीधा असर पेट्रोल की कीमतों पर पड़ा. अमेरिका में गाड़ी चलाने वाले लोगों से लेकर कारोबार करने वालों तक का खर्च बढ़ गया. ऐसे में पहले से महंगाई झेल रहे लोगों की परेशानी और बढ़ गई.
ट्रंप ने अपने बयान में साफ किया कि वह चुनावी नुकसान को देखते हुए ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई के फैसले पर दोबारा विचार नहीं करेंगे. उन्होंने कहा, "मुझे लगता है कि यह बात काफी हद तक सही है, क्योंकि इससे पेट्रोल की कीमतें बढ़ गईं. लेकिन अगर मुझे फिर से ऐसा करना पड़े, तो मैं फिर करूंगा. लंबे समय के लिहाज से यही एकमात्र रास्ता है. हम ईरान को परमाणु हथियार रखने की इजाजत नहीं दे सकते."
यानी ट्रंप मानते हैं कि युद्ध की वजह से उनकी पार्टी को चुनाव में नुकसान हुआ, लेकिन उनके लिए ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकना राजनीतिक फायदे से ज्यादा जरूरी है.
मिडटर्म चुनाव में दोनों सदनों का नियंत्रण गंवाने के बाद ट्रंप सरकार के लिए आने वाले दो साल आसान नहीं होंगे. डेमोक्रेट्स अब उनके फैसलों पर सवाल उठा सकेंगे और सरकार की नीतियों को चुनौती दे सकेंगे.
चुनाव में महंगाई, बढ़ता खर्च और ईरान युद्ध जैसे मुद्दे मतदाताओं की नाराजगी की वजह बने. ट्रंप ने भले ही युद्ध को लेकर अपना रुख साफ कर दिया हो, लेकिन चुनावी नतीजों ने दिखाया है कि विदेश नीति के फैसलों का असर आम लोगों की जेब तक पहुंचने पर घरेलू राजनीति भी प्रभावित होती है.
