'बलि का बकरा न बनाएं', फिल्म 'एनिमल' की आलोचना पर भड़के संदीप रेड्डी वांगा, जमकर सुनाया
आंध्र प्रदेश के एक स्कूल में 10वीं कक्षा की छात्रा पर आरी से हुए हमले के बाद, हिंसक फिल्मों का असल जिंदगी के अपराधों पर असर पड़ने की बहस छिड़ गई है. इस घटना ने सिनेमा में हिंसा को लेकर चर्चा छेड़ दी है, और सोशल मीडिया पर कई लोग इसकी तुलना 'एनिमल' और 'धुरंधर' जैसी फिल्मों से कर रहे हैं.
इस विवाद के बीच, फिल्म 'एनिमल' का एक खास सीन भी चर्चा में आ गया है, जिसमें रणबीर कपूर का किरदार हाथ में लोडेड बंदूक लेकर स्कूल के क्लासरूम में घुसता है.
आलोचकों पर भड़के संदीप रेड्डी वांगा आलोचनाओं का जवाब देते हुए, वांगा ने बुधवार, 4 नवंबर को 'X' (पहले ट्विटर) पर लिखा और उन लोगों से सवाल किया जो इस दुखद घटना का इस्तेमाल फिल्म निर्माताओं और उनके काम को निशाना बनाने के लिए कर रहे हैं. उन्होंने लिखा, 'जब कोई जघन्य अपराध करता है, तो सबसे पहले सहानुभूति दिखानी चाहिए और समस्या की जड़ को समझने की कोशिश करनी चाहिए, न कि सिनेमा को बलि का बकरा बनाना चाहिए.'
फिल्म निर्माता ने आगे आरोप लगाया कि कुछ आलोचक पीड़ितों और उनके परिवारों के प्रति सच्ची चिंता जताने के बजाय, इस भयानक घटना का इस्तेमाल अपना निजी हिसाब-किताब बराबर करने के लिए कर रहे हैं.
When someone commits a heinous crime, the first response should be empathy & an attempt to understand the larger problem. Not finding a convenient scapegoat in cinema. It is becoming increasingly clear that your concern is not for the victims or their families, but that you're using a horrific tragedy as a dirty excuse to settle your personal scores. This is especially directed at those failed frustrated jobless male/female actors, few directors, producers & parasites, who suddenly appoint themselves as social reformers whenever an opportunity arises to take a dig at someone else's work. A tragedy deserves empathy 🙏, not opportunism. Learn the difference.
वांगा ने आगे कहा, 'यह बात खास तौर पर उन असफल, निराश और बेरोजगार एक्टर-एक्ट्रेसेस, कुछ डायरेक्टर, प्रोड्यूसर और पैरासाइट्स के लिए है, जो किसी और के काम पर तंज कसने का मौका मिलते ही खुद को समाज सुधारक घोषित कर देते हैं.'
अपनी बात खत्म करते हुए फिल्ममेकर ने लिखा, 'ऐसी दुखद घटनाओं पर सहानुभूति होनी चाहिए, न कि मौकापरस्ती. दोनों के बीच का फर्क समझना सीखें.'
आंध्र प्रदेश के स्कूल में क्या हुआ था? यह विवाद तब शुरू हुआ जब आंध्र प्रदेश के अनंतपुर जिले के रापताडु में, 21 साल के हेमंत नाम के एक युवक ने कथित तौर पर एक स्कूल में घुसकर 10वीं कक्षा की 15 साल की छात्रा पर चेनसा (आरी) से हमला कर दिया.
इस दौरान, लक्ष्मी नाम की एक अन्य छात्रा ने बीच-बचाव करने और पीड़िता को बचाने की कोशिश की, जिसमें वह भी घायल हो गई. पुलिस की शुरुआती जांच के अनुसार, आरोपी पीड़िता का ही रिश्तेदार बताया जा रहा है. आरोप है कि वह काफी समय से लड़की का पीछा कर रहा था और जब लड़की ने उसके प्रस्ताव को ठुकरा दिया, तो उसने उस पर हमला कर दिया. घायल लड़की का बेंगलुरु के मणिपाल अस्पताल में इलाज चल रहा है और उसकी हालत स्थिर बताई गई है.

