अंतरिक्ष से भी डाल दिया अमेरिका चुनाव का वोट, वहां वोटिंग का क्या है सिस्टम?
अमेरिका में चुनाव हो और वोटिंग की चर्चा न हो, ऐसा कैसे हो सकता है. लेकिन इस बार चुनाव में एक ऐसी वोटिंग भी चर्चा में है, जो किसी मतदान केंद्र पर नहीं, बल्कि धरती से करीब 400 किलोमीटर ऊपर अंतरिक्ष में हुई.
जी हां, अमेरिकी अंतरिक्ष यात्री ने इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (ISS) में रहते हुए अपना वोट डाला. खास बात यह है कि अंतरिक्ष में रहते हुए भी उनका वोट उसी तरह चुनावी प्रक्रिया का हिस्सा बना, जैसे जमीन पर रहने वाले किसी आम अमेरिकी नागरिक का होता है.
अमेरिकी अंतरिक्ष यात्री अनिल मेनन ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो शेयर कर बताया कि उन्होंने अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन से वोट डाला है. उन्होंने कहा कि उन्हें अंतरिक्ष में रहते हुए भी वोट देने का मौका मिला और यह उनके लिए खास अनुभव था. लेकिन सवाल यह है कि आखिर अंतरिक्ष में बैठे किसी शख्स का वोट अमेरिका के चुनाव अधिकारियों तक कैसे पहुंचता है? क्या वहां भी कोई वोटिंग बूथ होता है और वोट डालने के लिए क्या प्रक्रिया अपनानी पड़ती है? आइए समझते हैं.
Yes, you can even vote from space! All three US crew members had the privilege of voting from space station. We filled out an electronic ballot and sent it securely to the election officials. https://t.co/hJCExQ2nKr
अंतरिक्ष यात्री का कमरा ही बन गया वोटिंग बूथ अनिल मेनन इस समय इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन पर तैनात हैं. वह जुलाई में रूसी अंतरिक्ष एजेंसी रोस्कोस्मोस के सोयुज MS-29 अंतरिक्ष यान से अंतरिक्ष पहुंचे थे. उन्होंने अपने वीडियो में दिखाया कि ISS पर उनका कमरा ही वोटिंग बूथ की तरह काम करता है.
टाइम की रिपोर्ट के मुताबिक, मेनन ने बताया कि उनके कमरे में एक कंप्यूटर है. इसी की मदद से उन्होंने इलेक्ट्रॉनिक फॉर्म भरा और अपना वोट हैरिस काउंटी भेज दिया. हैरिस काउंटी अमेरिका के टेक्सास राज्य में है और यहीं नासा का लिंडन बी. जॉनसन स्पेस सेंटर भी स्थित है.
मेनन के साथ ISS पर मौजूद अमेरिकी अंतरिक्ष यात्री जेसिका वाटकिंस और ल्यूक डेलाने ने भी वोट डाला. ये दोनों पिछले महीने स्पेसएक्स के रॉकेट से अंतरिक्ष स्टेशन पहुंचे थे.
अंतरिक्ष से वोट डालने का क्या है पूरा सिस्टम? दरअसल, अमेरिका में ऐसे नागरिकों के लिए पहले से व्यवस्था है, जो चुनाव के दिन अपने घर या मतदान क्षेत्र से दूर होते हैं. इनमें विदेश में रहने वाले अमेरिकी नागरिकों के साथ-साथ अंतरिक्ष यात्री भी शामिल हैं.
ऐसे लोगों को सबसे पहले फेडरल पोस्ट कार्ड एप्लिकेशन (FPCA) भरना होता है. इसके जरिए वे चुनाव अधिकारियों से अनुपस्थित मतदाता यानी एबसेंटी बैलेट मांग सकते हैं. इसके बाद उन्हें वोट डालने के लिए इलेक्ट्रॉनिक बैलेट की सुविधा मिलती है.
अंतरिक्ष यात्री भी इसी प्रक्रिया का इस्तेमाल करते हैं. वे ISS पर मौजूद कंप्यूटर के जरिए अपना इलेक्ट्रॉनिक बैलेट भरते हैं. लेकिन इसके बाद यह वोट धरती तक कैसे पहुंचता है?
सैटेलाइट के जरिए धरती पर पहुंचता है वोट नासा के मुताबिक, अंतरिक्ष यात्री का भरा हुआ इलेक्ट्रॉनिक बैलेट पहले NASA के ट्रैकिंग एंड डाटा रिले सैटेलाइट सिस्टम के जरिए धरती पर मौजूद एक ग्राउंड एंटीना तक पहुंचता है. यह एंटीना नासा की एक टेस्ट फैसिलिटी में लगा है.
इसके बाद वोट को टेक्सास के ह्यूस्टन स्थित मिशन कंट्रोल सेंटर भेजा जाता है. यहां से इसे संबंधित काउंटी के चुनाव अधिकारी यानी काउंटी क्लर्क तक पहुंचा दिया जाता है. यही अधिकारी उस मतदाता के वोट को चुनाव प्रक्रिया में शामिल करने की जिम्मेदारी संभालते हैं.
इस पूरी प्रक्रिया में वोट की गोपनीयता का भी ध्यान रखा जाता है. इलेक्ट्रॉनिक बैलेट को एन्क्रिप्ट किया जाता है, यानी उसे एक खास डिजिटल सुरक्षा कवच में रखा जाता है. इसे केवल संबंधित अंतरिक्ष यात्री और काउंटी क्लर्क ही एक्सेस कर सकते हैं.
1997 से अंतरिक्ष में वोट डाल रहे अमेरिकी अंतरिक्ष यात्री अंतरिक्ष से वोट डालने की यह व्यवस्था नई नहीं है. अमेरिकी अंतरिक्ष यात्री साल 1997 से अंतरिक्ष में रहते हुए मतदान कर रहे हैं.दरअसल, 1997 में टेक्सास की विधायिका ने एक कानून पास किया था. इसके बाद नासा के अंतरिक्ष यात्रियों को पृथ्वी की कक्षा में रहते हुए भी अमेरिकी चुनावों में वोट डालने की अनुमति मिल गई.अंतरिक्ष से वोट डालने वाले पहले अमेरिकी अंतरिक्ष यात्री डेविड वुल्फ थे. उन्होंने रूस के मीर स्पेस स्टेशन पर रहते हुए अपना वोट डाला था.
साल 2016 में द अटलांटिक को दिए एक इंटरव्यू में वुल्फ ने अपना अनुभव साझा किया था. उन्होंने बताया था कि अंतरिक्ष में वह अकेले वोट डाल रहे थे. वहां उनके आसपास अंग्रेजी बोलने वाला कोई दूसरा व्यक्ति भी नहीं था. ऐसे में अमेरिकी चुनाव का बैलेट मिलना और वोट डालना उन्हें अपने देश से जुड़ाव महसूस कराने वाला अनुभव था. वुल्फ के मुताबिक, अंतरिक्ष में वोट डालने से उन्हें लगा कि धरती पर रहने वाले लोग भी उनकी परवाह करते हैं.
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इस तरह अमेरिका में मतदान का अधिकार सिर्फ इस बात पर निर्भर नहीं करता कि कोई व्यक्ति चुनाव के दिन कहां मौजूद है. अगर कोई अमेरिकी नागरिक अंतरिक्ष में भी है, तो उसके लिए भी वोट डालने का रास्ता मौजूद है. यानी लोकतंत्र में उसकी भागीदारी के लिए धरती पर मौजूद होना जरूरी नहीं है.


