अमेरिका में मिड-टर्म इलेक्शन की वोटिंग, गिरती रेटिंग के बीच तीन मुद्दों पर घिरे हैं ट्रंप!

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अमेरिका में मंगलवार, 3 नवंबर को मिडटर्म चुनाव के लिए वोटिंग हो रही है. इस चुनाव में हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स की सभी 435 सीटों पर मतदान हो रहा है. इसे भारत के लिहाज से लोकसभा की तरह समझ सकते हैं. इसके साथ ही सीनेट की 35 सीटों पर भी वोटिंग हो रही है, जिसे भारत की राज्यसभा की तरह सम...

अमेरिका में मंगलवार, 3 नवंबर को मिडटर्म चुनाव के लिए वोटिंग हो रही है. इस चुनाव में हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स की सभी 435 सीटों पर मतदान हो रहा है. इसे भारत के लिहाज से लोकसभा की तरह समझ सकते हैं. इसके साथ ही सीनेट की 35 सीटों पर भी वोटिंग हो रही है, जिसे भारत की राज्यसभा की तरह समझा जा सकता है. अमेरिका में सीनेट की कुल 100 सीटें हैं. इसके अलावा 36 राज्यों के गवर्नर चुनने के लिए भी वोट डाले जा रहे हैं. माना जा रहा है कि इन चुनावों के नतीजों का असर 2028 के राष्ट्रपति चुनाव पर भी पड़ सकता है.

अमेरिका के सभी 50 राज्यों में वोटिंग चल रही है. अलग-अलग राज्यों में टाइम डिफरेंस होने की वजह से पूर्वी हिस्से के 8 राज्यों में सबसे पहले मतदान शुरू हुआ. इनमें कनेक्टिकट, इंडियाना, केंटकी, मेन, न्यू हैम्पशायर, न्यू जर्सी, न्यूयॉर्क और वर्जीनिया शामिल हैं. अमेरिका के पश्चिमी हिस्से की तुलना में पूर्वी हिस्से में सूर्योदय 2 से 3 घंटे पहले हो जाता है.

मिडटर्म चुनाव के लिए बड़ी संख्या में लोग पहले ही वोट डाल चुके हैं. अर्ली वोटिंग के तहत 5 करोड़ 70 लाख से ज्यादा वोटर अपने अधिकार का इस्तेमाल कर चुके हैं. इनमें 3 करोड़ 20 लाख लोगों ने पोलिंग बूथ पर जाकर इन-पर्सन वोटिंग की है. यानी इन लोगों ने चुनाव के दिन से पहले ही मतदान कर दिया. वहीं करीब 2 करोड़ 50 लाख लोगों ने मेल-इन बैलट के जरिए वोटिंग की है. यह पोस्टल बैलट की तरह है. इस बार अर्ली वोटिंग का आंकड़ा साल 2022 में हुई वोटिंग से ज्यादा है. 2022 में 4 करोड़ 60 लाख लोगों ने मतदान किया था, जबकि इस बार यह आंकड़ा साढ़े 5 करोड़ से ज्यादा पहुंच चुका है.

अमेरिका में 4 साल के लिए सरकार चुनी जाती है और दो साल बाद मिडटर्म चुनाव करवाए जाते हैं. यह अमेरिकी चुनावी व्यवस्था का हिस्सा है. इसे सरकार के लिए एक तरह का लिटमस टेस्ट माना जाता है, जिसमें जनता वोटिंग के जरिए सरकार के दो साल के कामकाज की समीक्षा करती है.

साल 1938 के बाद अमेरिका में हुए 22 मिडटर्म चुनावों में सिर्फ दो बार ऐसा हुआ है, जब राष्ट्रपति की पार्टी ने मिडटर्म चुनाव में बहुमत हासिल किया. साल 1998 में तत्कालीन राष्ट्रपति बिल क्लिंटन की डेमोक्रेटिक पार्टी और साल 2002 में तत्कालीन राष्ट्रपति जॉर्ज बुश की रिपब्लिकन पार्टी ने अपने-अपने कार्यकाल के मिडटर्म चुनाव में बहुमत हासिल किया था. मिडटर्म चुनाव में अगर विपक्ष मजबूत हो भी जाता है तो अमेरिकी सरकार नहीं गिरती. इसका असर यह होता है कि मौजूदा सरकार के लिए नए कानून पास कराना मुश्किल हो जाता है. फिलहाल हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स और सीनेट दोनों में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी बहुमत में है.

हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में बहुमत का आंकड़ा 218 है. रिपब्लिकन पार्टी के पास 219 सांसद हैं. इनमें रिपब्लिकन पार्टी के 218 सांसद और उनके साथ एक निर्दलीय सांसद हैं. डेमोक्रेटिक पार्टी के पास 214 सांसद हैं. वहीं सीनेट में बहुमत का आंकड़ा 51 है. रिपब्लिकन पार्टी के पास 53 सांसद हैं, जबकि डेमोक्रेटिक पार्टी के पास 45 और दो निर्दलीय सांसद हैं.

मौजूदा स्थिति में रिपब्लिकन और डेमोक्रेट्स के बीच कांटे की टक्कर मानी जा रही है. अगर मिडटर्म चुनाव में डेमोक्रेट्स बहुमत में आते हैं तो ट्रंप के लिए मुश्किलें बढ़ सकती हैं. यही वजह है कि ट्रंप हर हाल में मिडटर्म चुनाव में रिपब्लिकन पार्टी का बहुमत बनाए रखना चाहते हैं, ताकि अगले दो साल उनके कामकाज में बड़ी रुकावट न आए.

मिडटर्म चुनाव में पुराने चुनावी इतिहास के साथ ट्रंप की नीतियां भी उनके लिए चुनौती बनी हुई हैं. फिलहाल अमेरिका में तीन ऐसे बड़े मुद्दे हैं, जिनको लेकर ट्रंप घिरे हुए हैं. इनमें ईरान युद्ध, इमिग्रेशन और टैरिफ शामिल हैं.

ईरान युद्ध की वजह से अमेरिका में डीजल की कीमतें 70 प्रतिशत तक और पेट्रोल की कीमतें 50 प्रतिशत तक बढ़ी हैं. इसके अलावा ईरान युद्ध पर अमेरिका का भारी-भरकम बजट खर्च हो रहा है, जिससे ट्रंप पर सवाल उठ रहे हैं. दूसरा मुद्दा इमिग्रेशन और अवैध प्रवासियों को लेकर ट्रंप की नीतियां हैं. ट्रंप के कार्यकाल में 9 लाख से ज्यादा लोगों को डिपोर्ट किया गया है. आरोप लग रहे हैं कि इस नीति के तहत ऐसे लोगों को भी देश से निकाला जा रहा है, जिनका कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है. इससे खेती और इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े मजदूरों की कमी होने की बात कही जा रही है.

तीसरा मुद्दा टैरिफ का है. अमेरिकी सरकार की ओर से दूसरे देशों पर ज्यादा टैरिफ लगाने से जरूरी सामानों की कमी होने लगी है और महंगाई बढ़ी है. वहीं दूसरे देशों की ओर से लगाए गए रेसिप्रोकल टैरिफ से अमेरिकी व्यापारियों को भी नुकसान हो रहा है.

इन मुद्दों के बीच मिडटर्म चुनाव से पहले ट्रंप की अप्रूवल रेटिंग 31 प्रतिशत पर आ गई है. यह उनके कार्यकाल का सबसे कम स्तर है. लोकप्रियता में गिरावट के बीच ट्रंप चुनाव प्रचार में ज्यादा सक्रिय नजर आए हैं.

चुनाव प्रचार के आखिरी दौर में ट्रंप काफी सक्रिय रहे. व्हाइट हाउस के मुताबिक, ट्रंप ने पिछले 32 दिनों में 20 राज्यों का दौरा किया और 30 रैलियों को संबोधित किया. विश्लेषकों के मुताबिक, उनकी अप्रूवल रेटिंग काफी नीचे है और यह रिपब्लिकन उम्मीदवारों के लिए नुकसान का कारण बन सकती है.

अगर डेमोक्रेट्स अमेरिकी कांग्रेस पर नियंत्रण हासिल कर लेते हैं तो ट्रंप के फैसलों की ज्यादा जांच और निगरानी हो सकती है. इससे उनके एजेंडे को आगे बढ़ाना मुश्किल होगा. हालांकि, ट्रंप के पास एग्जीक्यूटिव ऑर्डर के जरिए शासन करने की शक्ति बनी रहेगी.

पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा ने ओहायो, मिशिगन और जॉर्जिया में डेमोक्रेटिक पार्टी के लिए रैलियां कीं. उन्होंने कहा कि यह चुनाव ट्रंप को रोकने के लिए आखिरी और सबसे अच्छा मौका है. उन्होंने इसे व्यवस्था का एक तरह का सर्किट-ब्रेकर बताया. वहीं चुनाव से ठीक पहले डेमोक्रेट्स को एक झटका भी लगा. मिशिगन की कांग्रेसवुमन हेली स्टीवंस रविवार को रिपब्लिकन खेमे में चली गईं. उन्होंने रिपब्लिकन उम्मीदवार माइक रोजर्स का समर्थन किया और उनके साथ सार्वजनिक तौर पर नजर आईं. स्टीवंस सीनेट प्राइमरी चुनाव में अब्दुल अल-सैयद से हार गई थीं. अल-सैयद के अमेरिकी सीनेट के लिए चुने जाने पर वह पहले मुस्लिम सीनेटर बन सकते हैं. स्टीवंस इजरायल की मजबूत समर्थक हैं, जबकि अल-सैयद इजरायल के आलोचक हैं.

अमेरिका के 36 राज्यों में गवर्नर पद के लिए भी चुनाव हो रहा है. ओहायो में भारतीय मूल के विवेक रामास्वामी और डेमोक्रेटिक उम्मीदवार एमी एक्टन के बीच करीबी मुकाबला है. कई भारतीय-अमेरिकी उम्मीदवार भी अलग-अलग पदों के लिए चुनाव मैदान में हैं. केरल में जन्मी डेमोक्रेट नित्या रमन लॉस एंजिल्स के मेयर पद के लिए अपनी पूर्व बॉस करेन बैस के खिलाफ मुकाबले में हैं.

यह भी पढ़ें: मिड टर्म इलेक्शन पर जंग! ट्रंप ने फ्लोरिडा में डाला वोट, ओबामा बोले- क्रूर और असभ्य हैं अमेरिकी प्रेसिडेंट

भारतीय-अमेरिकी सांसद रो खन्ना, एमी बेरा, प्रमिला जयपाल और सुहास सुब्रमण्यम हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स के लिए दोबारा चुनाव लड़ रहे हैं. वहीं पिया दांदिया और अमीश शाह पहली बार कांग्रेस सदस्य बनने के लिए चुनाव मैदान में हैं.

अमेरिका में करीब 21 करोड़ लोग वोट देने के लिए रजिस्टर्ड हैं. कैलिफोर्निया में सबसे ज्यादा 2.32 करोड़ रजिस्टर्ड वोटर हैं. इसके बाद टेक्सास में 1.74 करोड़ और फ्लोरिडा में 1.36 करोड़ रजिस्टर्ड वोटर हैं. ये तीनों राज्य मिलकर कुल रजिस्टर्ड वोटरों का करीब 26 प्रतिशत हिस्सा हैं. सबसे कम रजिस्टर्ड वोटर वाले राज्यों में व्योमिंग में 2,78,468, वर्मोंट में 4,59,455 और अलास्का में 6,03,310 वोटर हैं.

मिडटर्म चुनाव के नतीजों की शुरुआती तस्वीर बुधवार, 4 नवंबर को सामने आनी शुरू होगी. भारतीय समय के मुताबिक सुबह 5:30 बजे से शुरुआती वोटों की गिनती और शुरुआती अनुमान आने शुरू हो सकते हैं. इसके बाद सुबह 6:30 बजे बड़े राज्यों से ज्यादा नतीजे सामने आने की उम्मीद है. सुबह 7:30 बजे के बाद करीबी मुकाबलों वाली सीटों से ज्यादा महत्वपूर्ण नतीजे सामने आ सकते हैं. सुबह 8:30 बजे के आसपास पश्चिमी राज्यों से नतीजे आने शुरू होंगे. हालांकि करीबी मुकाबले वाली सीटों पर तस्वीर साफ होने में ज्यादा समय लग सकता है.

Original Source
https://www.aajtak.in/world/story/us-midterm-elections-2026-voting-underway-for-house-and-senate-seats-trump-test-ntc-apdy-dskc-2687659-2026-11-03?utm_source=rss
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