'मैंने भारतीय खाना छोड़ दिया...' कनाडा में रह रहे इंडियन के वीडियो पर छिड़ी बहस
भारतीय खाना छोड़कर फिटनेस पर फोकस करना... सुनने में थोड़ा अजीब लग सकता है. लेकिन कनाडा में रहने वाले एक भारतीय फिटनेस एंथूजियास्ट ने दावा किया है कि घर पर भारतीय खाना बनाना और भारतीय किराने का सामान खरीदना छोड़ना उसकी फिटनेस जर्नी का एक अहम फैसला रहा. शख्स का कहना है कि इस बदलाव के बाद उसके लिए कैलोरी और प्रोटीन को मैनेज करना आसान हो गया.
इंस्टाग्राम पर शेयर किए गए वीडियो में बंश नाम के इस शख्स ने बताया कि वह पिछले करीब डेढ़ साल से घर पर भारतीय खाना नहीं बना रहा है.
उसने कहा कि वह भारतीय ग्रॉसरी की नियमित खरीदारी भी नहीं करता और घर पर भारतीय खाना भी नहीं खाता. हालांकि, बाहर जाने पर वह भारतीय खाना खा लेता है.
बंश के मुताबिक, उसका मकसद भारतीय खाने की आलोचना करना नहीं है. उसने अपने फिटनेस रूटीन के लिए यह बदलाव किया है.
बंश ने बताया कि उसके लिए पारंपरिक भारतीय खाना तैयार करने में काफी समय लगता था.
पहले ग्रॉसरी खरीदना, फिर अलग-अलग मसालों की तैयारी और खाना बनाने में लगने वाला समय उसके लिए मुश्किल था. इसलिए उसने ऐसे भोजन का विकल्प चुना, जिसे तैयार करना और उसकी कैलोरी व प्रोटीन को ट्रैक करना उसके लिए आसान हो.
वीडियो में बंश ने अपनी एक दिन की रूटीन भी शेयर की. उसके मुताबिक, वह सुबह करीब 6:30 बजे से जागा हुआ था और शाम करीब 7 बजे काम से घर लौटा. दिन में चार बार खाना खाने के बावजूद उसने दावा किया कि वह कैलोरी डेफिसिट में था. उसने यह भी बताया कि उस दिन उसने 150 ग्राम से ज्यादा प्रोटीन लिया था.
काम के बाद थकान की वजह से उसका जिम जाने का मन नहीं था. लेकिन अपने शरीर में आए बदलाव देखकर उसे वर्कआउट पूरा करने की मोटिवेशन मिली. इसके बाद उसने प्री-वर्कआउट ड्रिंक लिया और जिम चला गया.
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बंश का कहना है कि उसकी नई खाने की आदत से उसका पेट भरा हुआ महसूस होता है और उसे 'मेंटल सैटिस्फैक्शन' भी मिलता है.अपने पोस्ट के कैप्शन में उसने दावा किया कि इस फैसले के बाद वह अपनी जिंदगी की बेस्ट शेप में है.
हालांकि, यह उसका व्यक्तिगत अनुभव है. इससे यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि भारतीय खाना छोड़ना हर व्यक्ति के लिए वजन घटाने या फिटनेस के लिए जरूरी है.
बंश की पोस्ट पर लोगों की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं आईं. कुछ यूजर्स ने कहा कि उन्होंने भी भारतीय खाना कम करके अपनी डाइट को मैनेज करना आसान पाया. वहीं कुछ लोगों ने इस बात से असहमति जताई.
एक यूजर ने कहा कि समस्या भारतीय डाइट नहीं, बल्कि डाइट को सही तरीके से मैनेज करने की है. उसके मुताबिक, भारतीय खाने में प्रोटीन और फाइबर दोनों शामिल किए जा सकते हैं.
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वीडियो पर चर्चा बढ़ने के बाद बंश ने यह भी स्पष्ट किया कि उसका मकसद किसी की भावनाओं को ठेस पहुंचाना या भारतीय खाने की आलोचना करना नहीं था.
उसने कहा कि उसका उद्देश्य उन लोगों को मोटिवेट करना है, जो अपनी फिटनेस में प्रोग्रेस नहीं कर पा रहे हैं. उसके मुताबिक, जो तरीका उसके लिए काम कर रहा है, वह किसी और के लिए भी काम कर सकता है.
यानी इस कहानी का मुद्दा भारतीय खाना अच्छा या खराब होना नहीं, बल्कि एक व्यक्ति का अपनी फिटनेस के लिए खाने की आदतों को बदलने का निजी अनुभव है.


