कब होगा इंसानों पर 'जॉम्बी अटैक'... वैज्ञानिकों ने खोल दिया सबसे बड़ा राज
कल्पना कीजिए कि कोई अदृश्य चीज आपके शरीर में घुस जाए. आपके व्यवहार को बदल दे. आपके नॉर्मल बिहेवियर को आपके खिलाफ कर दे. यह किसी हॉरर जॉम्बी फिल्म जैसी लगती है. असल में... प्रकृति में ऐसे जीव पहले से मौजूद हैं जो दूसरे जीवों के व्यवहार को अपने फायदे के लिए कंट्रोल कर सकते हैं.
वैज्ञानिक इन पैरासाइट और फंगस का लंबे समय से स्टडी कर रहे हैं. ये जीव फिल्मों के जॉम्बी की तरह नहीं होते, लेकिन उनका असर देखकर हैरानी होती है. जंगलों में ओफियोकोर्डिसेप्स नाम का एक फंगस चींटियों को संक्रमित करता है. संक्रमित चींटी अपना सामान्य रास्ता छोड़ देती है. पौधों पर चढ़ जाती है.
पत्ती या तने पर अपने जबड़े जकड़ लेती है. चींटी के मरने के बाद फंगस उसके शरीर से निकलकर बीजाणु छोड़ता है, जिससे नई चीटियां शिकार बनती हैं. वैज्ञानिक अब भी यह समझने की कोशिश कर रहे हैं कि यह फंगस चींटी के दिमाग और व्यवहार को इतनी सटीकता से कैसे प्रभावित करता है. यह प्रकृति के सबसे अजीब रहस्यों में से एक माना जाता है.
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सिर्फ फंगस ही नहीं, टॉक्सोप्लाज्मा गोंडी नाम का पैराइट भी जानवरों के व्यवहार को बदल सकता है. यह पैरासाइट चूहों को संक्रमित करता है. बिल्लियों के प्रति उनके स्वाभाविक डर को कम कर देता है. बिल्लियां इस पैरासाइट की मुख्य शिकार होती हैं.
जब संक्रमित चूहा बिल्ली द्वारा खाया जाता है, तो पैरासाइट अपना जीवन चक्र पूरा करता है. यह पैरासाइट इंसानों को भी संक्रमित कर सकता है. शरीर के ऊतकों, यहां तक कि दिमाग में लंबे समय तक सिस्ट बना सकता है. हालांकि इसके मानव व्यवहार पर क्या असर पड़ता है, ये अभी रिसर्च का विषय हैं. वैज्ञानिकों के पास कोई सबूत नहीं है कि यह इंसानों को जॉम्बी बना देता है.
रेबीज एक और वास्तविक बीमारी है जो नर्वस सिस्टम पर हमला करती है. संक्रमित जानवर और इंसानों में भ्रम, बेचैनी, मतिभ्रम और असामान्य व्यवहार पैदा हो सकता है. फिल्मों वाले जॉम्बी से उलट ये लक्षण गंभीर इंफेक्शन के कारण होते हैं जो दिमाग को नुकसान पहुंचाते हैं. बिना रोकथाम और इलाज के यह बीमारी जानलेवा साबित होती है. रेबीज वायरस मुख्य रूप से संक्रमित जानवर के काटने से फैलता है. वैक्सीनेशन से इसे रोका जा सकता है.
क्या इंसानों में जॉम्बी अटैक संभव है?
वैज्ञानिक सबूत बताते हैं कि फिल्मों में दिखाए गए मानव जॉम्बी किसी ज्ञात जीव से नहीं हैं. जो फंगस चींटियों को नियंत्रित करते हैं, वे खास तरह के कीड़ों के लिए ही होते हैं. कोर्डिसेप्स फंगस के बारे में कोई प्रमाण नहीं है कि वह स्वाभाविक रूप से इंसानों को जॉम्बी जैसा बना सके.
टॉक्सोप्लाज्मा भी आमतौर पर एक इंसान से दूसरे इंसान में सीधे नहीं फैलता. ये जीव अपने खास मेजबानों पर निर्भर रहते हैं. मानव शरीर में वैसा नियंत्रण नहीं दिखाते जैसा कीड़ों में दिखता है. फिर भी असली कहानी कल्पना से ज्यादा रोचक है. इवोल्यूशन ने ऐसे जीव पैदा किए हैं जो दूसरे जीवित प्राणियों के व्यवहार को प्रभावित कर सकते हैं. कभी-कभी यह असर इतना अद्भुत लगता है कि विश्वास करना मुश्किल हो जाता है.
इन्हें किसी अलौकिक शक्ति की जरूरत नहीं. लाखों साल की प्रक्रिया ने इन्हें बेहतरीन जैविक तरीके दिए हैं. वैज्ञानिक इन सिस्टम्स को समझकर नई दवाओं और जैविक नियंत्रण के तरीके खोजने की कोशिश कर रहे हैं. फिल्मों के जॉम्बी डर पैदा करते हैं, लेकिन वास्तविक पैरासाइट हमें विज्ञान की गहराई दिखाते हैं.
ओफियोकोर्डिसेप्स, टॉक्सोप्लाज्मा और रेबीज जैसे जीव हमें बताते हैं कि व्यवहार नियंत्रण प्रकृति में संभव है, लेकिन मानव जॉम्बी अटैक की कोई वैज्ञानिक संभावना फिलहाल नहीं है. शोध जारी है और भविष्य में हमें इन रहस्यों के और पहलू पता चल सकते हैं.


