पठान-जवान हिंदी, तो हमारी फिल्में पैन इंडिया क्यों? 'द पैराडाइज' की रिलीज से पहले भड़के नानी
साउथ सिनेमा के मशहूर एक्टर नानी की मचअवेटेड एक्शन-थ्रिलर फिल्म 'द पैराडाइज' आगामी 24 सितंबर को सिनेमाघरों में दस्तक देने के लिए तैयार है. फिल्म के प्रमोशन के सिलसिले में आयोजित एक प्रेस मीट के दौरान एक्टर ने फिल्म इंडस्ट्री में 'पैन-इंडिया' टैग को लेकर अपनी बेबाक राय रखी.
नानी ने साफ शब्दों में कहा कि वे अपनी फिल्मों के आगे इस तरह का कोई ठप्पा नहीं देखना चाहते. उनका मानना है कि जब कोई हिंदी फिल्म देश भर में सफलता हासिल करती है, तो उसे सिर्फ 'हिंदी फिल्म' ही कहा जाता है, लेकिन जैसे ही कोई साउथ इंडियन फिल्म वही कमाल दिखाती है, तो उस पर 'पैन-इंडिया' का लेबल चिपका दिया जाता है.
नानी को बेबाक बयान प्रेस मीट के दौरान जब एक पत्रकार ने उनसे 'पैन-इंडिया' टैग को हटाने और फिल्म को मूल रूप से तेलुगु के साथ-साथ तमिल और अन्य भाषाओं में लाने को लेकर सवाल पूछा, तो नानी ने अपना रुख पूरी तरह स्पष्ट कर दिया.
नानी ने कहा, 'जब कोई हिंदी फिल्म अच्छा प्रदर्शन करती है, तो हम उसे हिंदी फिल्म ही कहते हैं. लेकिन जब कोई साउथ इंडियन फिल्म अच्छा करती है, तो हम उसे पैन-इंडिया फिल्म कहने लगते हैं. इसलिए, मैं अपनी फिल्मों को पैन-इंडिया फिल्में नहीं कहना चाहता.'
BOLD Statement from #Nani: The reason I say, “Don’t call my film Pan-Indian,” is: If a Hindi film becomes a big success in Telugu and Tamil versions, it is still called a Hindi film. It is not called a “Pan-Indian film.” But if a Telugu or Tamil film does well across the… pic.twitter.com/Kc6c9KttbN
जवान-पठान का किया जिक्र बातचीत के दौरान नानी ने इस टैग के पीछे के दोहरे रवैये पर सवाल उठाते हुए कहा, 'अगर 'जवान' या 'पठान' जैसी हिंदी फिल्में तमिल, तेलुगु या अन्य भाषाओं के वर्जन में बहुत बेहतरीन प्रदर्शन करती हैं, तब भी उन्हें कोई पैन-इंडिया फिल्म नहीं कहता, वे तब भी हिंदी फिल्म ही कहलाती हैं. फिर यही नियम साउथ की फिल्मों पर लागू क्यों नहीं होता? मुझे समझ ही नहीं आता कि यह 'पैन-इंडिया' शब्द खासतौर पर साउथ की फिल्मों के लिए ही क्यों गढ़ा गया है.'
मुझे ये टैग नहीं चाहिए- नानी नानी ने आगे कहा कि वे किसी को यह शब्द इस्तेमाल करने से जबरन रोक तो नहीं सकते, लेकिन एक कलाकार के तौर पर वे बस इतनी गुजारिश कर सकते हैं कि उनकी फिल्मों को इस टैग से दूर रखा जाए.
उन्होंने कहा, "मेरा मकसद हमेशा यही रहेगा कि मेरी फिल्में तमिल, हिंदी, मलयालम और कन्नड़ हर भाषा के दर्शकों तक पहुंचे. यह एक सामान्य प्रक्रिया है, लेकिन मैं अपनी फिल्मों पर यह टैग नहीं चाहता. लोग फिर भी इसे बोलेंगे, इसमें मैं ज्यादा कुछ नहीं कर सकता, लेकिन मैं सिर्फ अपनी बात रख सकता हूं और रिक्वेस्ट कर सकता हूं.'
