DUSU चुनाव के बाद जश्न पर हाईकोर्ट सख्त, विजय जुलूस पर लगाई रोक
दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ (DUSU) चुनाव के नतीजे आने के बाद होने वाले जश्न और विजय जुलूस को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है. कोर्ट ने साफ किया है कि रिजल्ट घोषित होने के बाद किसी भी उम्मीदवार को कैंपस, हॉस्टल या दिल्ली की सड़कों पर जीत का जुलूस निकालने या सार्वजनिक तौर पर जश्न मनाने की अनुमति नहीं होगी.
चीफ जस्टिस देवेंद्र कुमार उपाध्याय और जस्टिस तेजस कारिया की पीठ ने कहा कि अदालत के निर्देशों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी. कोर्ट ने चुनाव के दौरान होने वाली हुड़दंगबाजी, गाड़ियों के काफिले और आचार संहिता के उल्लंघन पर भी चिंता जाहिर की है.
सुनवाई के दौरान पीठ ने छात्र राजनीति में बढ़ते अनुशासनहीन व्यवहार का मुद्दा भी उठाया. अदालत ने कहा कि चुनाव के नाम पर 10 से 20 वाहनों का काफिला निकालना, बिना नंबर प्लेट की गाड़ियों का इस्तेमाल करना और सड़कों पर स्टंट करना अन्य छात्रों और आम लोगों के लिए उचित नहीं है.
कोर्ट ने इस दौरान पिछली साल हुई घटना का भी जिक्र किया. कोर्ट ने कहा कि पिछले साल थोड़ी सी छूट देने के बाद चुनाव जीतने के बाद एक उम्मीदवार द्वारा शिक्षक को थप्पड़ मारने जैसी घटना सामने आई थी. अदालत ने माना कि ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए पहले से कड़े कदम उठाना जरूरी है.
हाईकोर्ट ने DUSU चुनाव में हिस्सा लेने वाले उम्मीदवारों के साथ-साथ ABVP, NSUI, ASAP सहित विभिन्न छात्र संगठनों को शो-कॉज नोटिस जारी किया है. अदालत ने उनसे यह बताने को कहा है कि चुनाव आचार संहिता के कथित उल्लंघन और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के मामलों में भारी और अनुकरणीय जुर्माना क्यों न लगाया जाए.
अदालत ने दिल्ली पुलिस को भी निर्देश दिए कि छात्रों के नाम पर नियमों के उल्लंघन को लेकर किसी तरह की रियायत न दें. पीठ ने कहा कि हथियार लेकर घूमने, बिना नंबर प्लेट वाले गाड़ियों का इस्तेमाल करने या सड़क पर स्टंट करने जैसी गतिविधियों को केवल छात्र होने के आधार पर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता.
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