'राम' बनकर रणबीर की सबसे बड़ी 'अग्निपरीक्षा', 4000 करोड़ की 'रामायण' पर दुनिया की नजर

Direct Source Verification: This story is aggregated from India Today (indiatoday.in). Full reporting rights and copyright belong to the primary publisher.
करीब चार दशक पहले दूरदर्शन पर रामानंद सागर की 'रामायण' शुरू होती थी तो सड़कों पर सन्नाटा पसर जाता था. आज वही पौराणिक गाथा भारतीय सिनेमा के सबसे बड़े दांव के साथ बड़े पर्दे पर लौट रही है. हजारों करोड़ रुपये का बजट, रणबीर कपूर से लेकर यश तक सितारों की लंबी फेहरिस्त, दुनियाभर के दर्...

करीब चार दशक पहले दूरदर्शन पर रामानंद सागर की 'रामायण' शुरू होती थी तो सड़कों पर सन्नाटा पसर जाता था. आज वही पौराणिक गाथा भारतीय सिनेमा के सबसे बड़े दांव के साथ बड़े पर्दे पर लौट रही है. हजारों करोड़ रुपये का बजट, रणबीर कपूर से लेकर यश तक सितारों की लंबी फेहरिस्त, दुनियाभर के दर्शकों तक पहुंचने की महत्वाकांक्षा और असाधारण सफलता की उम्मीदें. ऐसे में 'रामायण' की रिलीज सिर्फ एक फिल्म की रिलीज नहीं, बल्कि भारतीय सिनेमा के लिए एक बड़ी परीक्षा बन गई है. रिलीज से पहले रिकॉर्डतोड़ एडवांस बुकिंग ने दर्शकों की बेताबी का संकेत दे दिया है, लेकिन इस सफर में फिल्म विवादों से भी घिरी रही. कभी इसके म्यूजिक को लेकर सवाल उठे तो कभी वीएफएक्स पर बहस छिड़ी. अब इतने शोर, इतनी उम्मीदों और इतने बड़े दांव के बीच सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या 'रामायण' सिर्फ बॉक्स ऑफिस पर कामयाबी हासिल करेगी या भारतीय सिनेमा के लिए एक नया बेंचमार्क भी तय करेगी?

दरअसल, 'रामायण' को एक सामान्य पीरियड फिल्म की तरह नहीं बनाया गया है, जिसमें भव्य सेट और युद्ध के कुछ दृश्य दिखाकर कहानी कह दी जाए. यह भारतीय महाकाव्य की पूरी दुनिया को बड़े सिनेमाई कैनवास पर जीवंत करने की कोशिश है. इसके लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर की तकनीकी टीम को जोड़ा गया है. फिल्म के विजुअल इफेक्ट्स की जिम्मेदारी डीएनईजी जैसी प्रतिष्ठित कंपनी ने संभाली है, जो हॉलीवुड की कई बड़ी फिल्मों में अपने काम के लिए जानी जाती है. वहीं, इसे आईमैक्स समेत प्रीमियम फॉर्मेट में रिलीज किया जा रहा है, ताकि दर्शकों को बड़े पर्दे पर भव्य और इमर्सिव सिनेमाई अनुभव मिल सके. यानी मेकर्स की योजना सिर्फ भारतीय दर्शकों को आकर्षित करने तक सीमित नहीं है. वे 'रामायण' को ऐसी वैश्विक सिनेमाई पेशकश बनाना चाहते हैं, जो भारतीय पौराणिक कथा और आधुनिक फिल्म तकनीक का संगम दुनिया भर के दर्शकों के सामने रख सके.

लेकिन इतनी बड़ी महत्वाकांक्षा के साथ दर्शकों की अपेक्षाएं और सवाल भी कम नहीं हैं. खासकर तब, जब कहानी रामायण जैसी हो और उससे करोड़ों लोगों की धार्मिक आस्थाएं जुड़ी हों. फिल्म के संगीत को लेकर सबसे ज्यादा चर्चा हुई. एआर रहमान और हैंस जिमर जैसे दिग्गजों के जुड़ने से उम्मीद थी कि इसका संगीत भारतीय पौराणिक कथा को एक अलग पहचान देने के साथ अंतरराष्ट्रीय स्तर की भव्यता भी देगा. मगर 'मंगल रंग' रिलीज होते ही बहस छिड़ गई. कुछ ने इसमें सूफी और कव्वाली का प्रभाव महसूस हुआ. सवाल उठे कि राम के अयोध्या लौटने जैसे प्रसंग के लिए इस तरह का संगीत कितना उपयुक्त है. कुछ लोगों ने इसकी धुनों की तुलना एआर रहमान के पुराने गानों से भी की. यानी जिस संगीत से फिल्म की भव्यता को एक नया आयाम मिलने की उम्मीद थी, वही रिलीज से पहले बहस का विषय बन गया.

म्यूजिक के बाद फिल्म के विजुअल इफेक्ट्स यानी वीएफएक्स को लेकर भी दर्शकों की राय बंटी नजर आई. फिल्म की पहली झलक और ट्रेलर सामने आए तो कुछ लोगों ने इसके भव्य विजुअल्स की तारीफ की, लेकिन कई दर्शकों को जंगल, आसमान और दूसरे डिजिटल दृश्य जरूरत से ज्यादा आर्टिफिशियल लगे. सोशल मीडिया पर इसकी तुलना 'आदिपुरुष' से भी होने लगी. यह तुलना इसलिए अहम थी, क्योंकि 'आदिपुरुष' को भी बड़े बजट और आधुनिक तकनीक के साथ एक भव्य पौराणिक फिल्म के तौर पर पेश किया गया था, लेकिन उसके वीएफएक्स और किरदारों के चित्रण को लेकर दर्शकों ने तीखी नाराजगी जताई थी. ऐसे में 'रामायण' के सामने चुनौती सिर्फ बड़े और शानदार दृश्य रचने की नहीं थी, बल्कि उन्हें विश्वसनीय बनाने की भी थी.

फिल्म में किरदारों के चुनाव को लेकर भी खूब चर्चा हुई. रणबीर कपूर को राम के रूप में देखने के लिए दर्शकों में उत्सुकता रही है. रणबीर का करियर ऐसे किरदारों से भरा रहा है जिनमें प्रेम, विद्रोह, बेचैनी, गलतियां और भावनात्मक जटिलताएं दिखाई देती हैं. ऐसे में उनका मर्यादा पुरुषोत्तम राम की भूमिका निभाना उनके अभिनय करियर का एक बिल्कुल अलग पड़ाव है. उनके सामने चुनौती सिर्फ राम के रूप में दिखाई देने की नहीं, बल्कि उस मर्यादा, संयम और आंतरिक शक्ति को पर्दे पर उतारने की है, जिसके लिए यह किरदार जाना जाता है.

यही वजह है कि रणबीर की कास्टिंग को लेकर शुरुआत से बहस होती रही है. उनके पुराने किरदारों, निजी जीवन और सार्वजनिक छवि को राम की भूमिका के साथ रखकर सवाल उठाए गए. कुछ लोगों ने इस चुनाव का विरोध किया तो कुछ ने इसे अभिनेता के लिए एक बड़ी चुनौती और करियर का निर्णायक मोड़ बताया. रणबीर के लिए यह महज एक और फिल्म नहीं है. वह ऐसे चरित्र को निभा रहे हैं, जिसे भारतीय जनमानस में आदर्श पुरुष के रूप में देखा जाता है. उनकी सफलता का पैमाना सिर्फ बॉक्स ऑफिस नहीं होगा, बल्कि यह भी होगा कि दर्शक उन्हें राम के रूप में स्वीकार करते हैं या नहीं.

एक दिलचस्प बात यह भी है कि रणबीर के करियर को देखें तो उनके कई चर्चित किरदार कमजोरियों, बेचैनी, विद्रोह और भावनात्मक उलझनों से भरे रहे हैं. अब वह मर्यादा पुरुषोत्तम राम की भूमिका में हैं. रॉकस्टार से राम तक का यह सफर उनके अभिनय करियर का सबसे बड़ा विरोधाभास भी है और सबसे बड़ी संभावना भी.

दूसरी तरफ सीता के रूप में साई पल्लवी के चुनाव को लेकर भी सोशल मीडिया पर बहस हुई. उनके सांवले रंग, मेकअप, हेयरस्टाइल और हिंदी उच्चारण तक पर टिप्पणियां की गईं. कुछ लोगों ने एक दक्षिण भारतीय अभिनेत्री को सीता की भूमिका दिए जाने पर भी सवाल उठाए. हालांकि इस आलोचना के बीच यह सवाल भी महत्वपूर्ण रहा कि क्या किसी कलाकार को उसके अभिनय और किरदार के प्रति समझ के बजाय उसकी क्षेत्रीय पहचान और बाहरी रंग-रूप के आधार पर परखा जाना चाहिए? लारा दत्ता के कैकेयी वाले लुक पर भी कुछ दर्शकों ने सवाल उठाए. उनके कपड़ों और हेयरस्टाइल को त्रेतायुग की कल्पना के मुकाबले आधुनिक बताया गया.

रामायण' को लेकर मेकर्स की महत्वाकांक्षा बॉक्स ऑफिस तक सीमित नहीं है. फिल्म को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी एक बड़े प्रोजेक्ट के तौर पर स्थापित करने की कोशिश की गई है. 27 अक्टूबर को अमेरिका के लॉस एंजेलिस में इसका ग्रैंड प्रीमियर किया गया, जहां फिल्म की पूरी स्टारकास्ट पहुंची. अंतरराष्ट्रीय दर्शकों के सामने फिल्म को पेश करना इस रणनीति का अहम हिस्सा रहा. फिल्म हिंदी, तमिल, तेलुगू, कन्नड़, मलयालम और अंग्रेजी में रिलीज हो रही है. इससे साफ है कि मेकर्स रामायण की कहानी को सिर्फ भारतीय भाषाओं के दर्शकों तक नहीं, बल्कि दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में पहुंचाना चाहते हैं.

फिल्म के निर्माता नमित मल्होत्रा की योजना भी इसे महज दो फिल्मों तक सीमित रखने की नहीं है. वह रामायण को एक बड़े सिनेमाई संसार के रूप में पेश करने की महत्वाकांक्षा रखते हैं. इस सोच में भविष्य में अलग-अलग कहानियों, किरदारों और दूसरे माध्यमों के जरिए इस दुनिया का विस्तार करने की संभावना भी शामिल है. हॉलीवुड की बड़ी फ्रेंचाइजी की तरह भारतीय पौराणिक कथाओं को भी एक वैश्विक सिनेमाई पहचान दिलाने की कोशिश के तौर पर इसे देखा जा रहा है.

रामानंद सागर की रामायण से कितनी अलग होगी फिल्म?

'रामायण' की चर्चा में रामानंद सागर की दूरदर्शन वाली रामायण का जिक्र होना स्वाभाविक है. 1987 में प्रसारित हुई उस रामायण ने भारतीय टेलीविजन के इतिहास में एक अलग जगह बनाई थी. राम के रूप में अरुण गोविल और सीता के रूप में दीपिका चिखलिया को दर्शकों ने सिर्फ कलाकारों के तौर पर नहीं, बल्कि आराध्य के रूप में स्वीकार किया. उस दौर में टेलीविजन पर रामायण देखने के लिए लोग अपने काम रोक देते थे. कई जगहों पर टीवी के सामने फूल चढ़ाए जाते थे और प्रसारण के समय सड़कों पर आवाजाही कम हो जाती थी. उस दौर की रामायण की ताकत उसके सीमित संसाधनों के बावजूद कहानी, संवाद, संगीत और दर्शकों से बने भावनात्मक रिश्ते में थी.

आज की 'रामायण' के पास आधुनिक तकनीक, विशाल बजट, अंतरराष्ट्रीय स्तर के कलाकार और विजुअल इफेक्ट्स की ताकत है. लेकिन इसकी तुलना रामानंद सागर की रामायण से होना भी लगभग तय है. फर्क यह है कि दोनों अपने-अपने दौर की जरूरतों और माध्यमों के हिसाब से बनाई गई हैं. आज के दर्शक भव्यता और तकनीकी गुणवत्ता की अपेक्षा रखते हैं, लेकिन रामायण जैसी कथा में सिर्फ विजुअल इफेक्ट काफी नहीं होते. किरदारों की गरिमा, भावनाओं की गहराई और कहानी के प्रति ईमानदारी भी उतनी ही जरूरी है.

फिल्म की रिलीज से पहले जिस चीज ने सबसे ज्यादा ध्यान खींचा है, वह है इसकी एडवांस बुकिंग. 20 अक्टूबर को दशहरे के मौके पर इसकी एडवांस बुकिंग शुरू हुई थी. सैकनिल्क के आंकड़ों के मुताबिक फिल्म ने भारत और विदेशों में करीब 110.35 करोड़ रुपये की ग्रॉस एडवांस बुकिंग कर ली है. इसमें 29.57 लाख टिकट शामिल हैं. यह आंकड़ा बताता है कि फिल्म को लेकर दर्शकों में किस स्तर का उत्साह है.  मुंबई के कुछ प्रीमियम थिएटर्स में आईमैक्स और लग्जरी सीटों के टिकट 2000 रुपये से ऊपर पहुंचे. कुछ रिपोर्टों में 2700 रुपये से ज्यादा कीमत वाले टिकटों का भी जिक्र हुआ.

फिल्म के पक्ष में जहां एक तरफ रिकॉर्ड एडवांस बुकिंग है, बड़े सितारों की मौजूदगी है और एक ऐसी कहानी है जिसे भारत में पीढ़ियों से सुना और देखा जाता रहा है. दूसरी तरफ भारी बजट, दर्शकों की अपेक्षाएं, म्यूजिक और वीएफएक्स को लेकर हुई बहसें और रामानंद सागर की रामायण से होने वाली तुलना भी है. ऐसे में 'रामायण' के लिए सिर्फ पहले दिन की कमाई बड़ा पैमाना नहीं होगी. उसे दर्शकों के दिलों में जगह बनानी होगी. आखिरकार राम की कहानी की ताकत सिर्फ उसके युद्ध, भव्यता और चमत्कारों में नहीं, बल्कि उसके मूल्यों और भावनात्मक जुड़ाव में रही है. अब देखना यह है कि हजारों करोड़ रुपये और आधुनिक तकनीक के सहारे बनाई गई यह रामायण उस जुड़ाव को कितनी मजबूती से पर्दे पर उतार पाती है. क्या यह सिर्फ बॉक्स ऑफिस का रिकॉर्ड बनाएगी या भारतीय सिनेमा के इतिहास में सचमुच एक नया अध्याय लिखेगी?

Original Source
https://www.aajtak.in/entertainment/news/story/ramayana-release-worldwide-ranbir-kapoor-ram-ravana-4000-crore-movie-rttm-dskc-2688383-2026-11-05?utm_source=rss
Visit India Today ↗
SHARE STORY:
𝕏 f in

Related Coverage in World