आजमगढ़ हत्याकांड: कौन थे वो 2 पुरोहित जिन्हें पूजा-पाठ के दौरान अरविंद सिंह ने मार डाला? परिजनों का छलका दर्द

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उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ जिले के शंभूपुर गांव में पूजा के दौरान अरविंद सिंह ने अपनी पत्नी बबीता और दो पुरोहितों की गोली मारकर हत्या कर दी. इसके बाद पुलिस कार्रवाई में आरोपी अरविंद की भी मौत हो गई. अब पीड़ित पुरोहित परिवार का दर्द छलका है. उन्होंने बताया कि अरविंद ने घर में चल रही म...

उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ जिले के शंभूपुर गांव में पूजा के दौरान अरविंद सिंह ने अपनी पत्नी बबीता और दो पुरोहितों की गोली मारकर हत्या कर दी. इसके बाद पुलिस कार्रवाई में आरोपी अरविंद की भी मौत हो गई. अब पीड़ित पुरोहित परिवार का दर्द छलका है. उन्होंने बताया कि अरविंद ने घर में चल रही महामृत्युंजय पूजा के दौरान पुरोहितों से पहचान दस्तावेज मांगा. कहासुनी हुई तो उसने अपनी पत्नी बबीता और पूजा कराने गए दो पुरोहितों की गोली मारकर हत्या कर दी. घटना के बाद अरविंद ने अपने तीन मासूम बच्चों को बंधक बना लिया, जिसके बाद पुलिस की जवाबी कार्रवाई और रेस्क्यू ऑपरेशन में वो ढेर हो गया और बाद में उसके घायल बेटे की भी मौत हो गई. पुरानी पारिवारिक रंजिश और मानसिक तनाव के बीच हुए इस कांड में कुल पांच लोगों की जान चली गई.

मृतक महेंद्र पाठक के बड़े भाई राजेंद्र पाठक ने मीडिया से बातचीत में अपना दर्द बयां किया. उन्होंने बताया कि उनका परिवार कई पीढ़ियों से अरविंद के घर पुरोहिताई करता आ रहा था. जब अरविंद के बड़े भाई सुनील सिंह की हत्या हुई थी, तब पैसे न होने के बावजूद उनके परिवार ने आत्मा की शांति के लिए पूजा कराई थी. राजेंद्र ने कहा कि अब उनका परिवार इस घर के लिए कभी पूजा-पाठ या पुरोहिताई नहीं करेगा.

बता दें कि अरविंद सिंह ने जिन दो पुरोहितों की हत्या की उसमें दोनों मौसेरे भाई थे. मृतक महेंद्र पाठक का परिवार कई पीढ़ियों से अरविंद के परिवार में पूजा-पाठ करते आ रहा था. पुरोहित का काम करने वाले महेंद्र पाठक के साथ उनके मौसेरे भाई अखिलेश मिश्रा और मिश्रा के बेटे आयुष पूजा-पाठ करने गए थे. जिसमें अरविंद ने महेंद्र और अखिलेश की गोली मारकर हत्या कर दी. आयुष किसी तरह जान बचाकर भाग निकला. इस घटना के बाद इलाके में भारी पुलिस बल तैनात है. 

मृतक अखिलेश मिश्रा कितौना भटौली के रहने वाले थे. वहीं, महेंद्र पाठक पटखौली के निवासी थे. दोनों आपस में रिश्तेदार थे. बीती शाम हुई वारदात ने दोनों परिवारों को जिंदगी भर का गम दे दिया. घर में चीख-पुकार मची है. परिजनों को समझ नहीं आ रहा है कि आखिर इस हत्याकांड को क्यों अंजाम दिया गया. जबकि, आरोपी पहले से मृतकों को जानता था. क्या खाली सनक और पड़ोसी से रंजिश इसकी जिम्मेदार है?

हत्यारोपी अरविंद सिंह के एक पड़ोसी का कहना है, "वह मानसिक रूप से परेशान था... कल पूजा हो रही थी. पूरा गांव देख रहा था; अचानक उसने अजीब हरकतें कीं- वह पागलों की तरह व्यवहार करने लगा...फिर गोली मारकर लोगों की जान ले ली"

मुख्य आरोपी की मां श्यामबला देवी ने बताया कि अरविंद के भले के लिए उसकी पत्नी बबीता तीन दिनों से महामृत्युंजय जाप करवा रही थी. शाम को जब अरविंद घर पहुंचा, तो उसने पुरोहितों से पहचान पत्र मांगा. बबीता ने पुरोहितों के इस अपमान का विरोध किया, जिससे गुस्सा होकर अरविंद ने पहले पत्नी और फिर भाग रहे दो पुरोहितों की हत्या कर दी.

परिजनों के अनुसार, अरविंद के भाई सुनील सिंह की भी हत्या हुई थी. सुनील की आत्मा की शांति, गृह क्लेश और अन्य बाधाओं के निवारण के लिए घर वालों ने महामृत्युंजय का जाप शुरू करवाया था. लेकिन इसी दौरान भयानक कांड हो गया जिसने पूरे पूर्वांचल को दहला दिया. 

मां के अनुसार, 12 अक्टूबर 2018 को बड़े भाई सुनील सिंह की हत्या के बाद से अरविंद काफी परेशान रहने लगा था. जिस रिवाल्वर से यह वारदात अंजाम दी गई, वह भी उसके बड़े भाई सुनील सिंह की ही थी, जो बाद में अरविंद के नाम ट्रांसफर हुई थी. 2015 के एक मुकदमे और भाई की हत्या के बाद से परिवार लगातार तनाव से गुजर रहा था.

Original Source
https://www.aajtak.in/uttar-pradesh/story/azamgarh-purohit-family-pain-priest-mahendra-pathak-and-akhilesh-mishra-murder-case-lclam-strc-2650903-2026-09-23?utm_source=rss
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